अधिकतर लोगों की धार्मिकता किताबी धार्मिकता है | बिलकुल वैसे ही जैसे कोई रट्टामार, फर्रे चलाकर डिग्रीधारी हो जाता है | इंटरव्यू में भी रटे-रटाये उत्तर देता है और इंजीनयर भी बन जाता है | फिर पुल गिरता है, बिल्डिंग गिरती है उस इंजीनियर द्वारा बनाए हुए और कई लोग मरते हैं | कोर्ट केस का ड्रामा होता है और इंजीनियर बाइज्जत बरी होता है | बस यही सब धर्म के ठेकेदारों के साथ भी होता है | और यही सब होता है खोखले धार्मिकों के साथ | हर जगह लुटते हैं धर्म के नाम पर फिर भी अक्ल नहीं आती | कुछ अच्छे सिरफिरे सही राह दिखाने की कोशिश करते हैं, जब सही धर्म समझाने की कोशिश करते हैं तो घमंड आ जाता है सामने कि हमें तो किताबें पढ़ी हैं...चाहे समझ में धेले भर न आयी हो, लेकिन धार्मिकता की डिग्री तो मिली हुई है | इसलिए अकड़ है | लाजवंती के पौधे की तरह छुईमुई आपकी धार्मिक भावनाएँ आहत हो जातीं हैं | फिर मैं इस्लाम और मजहबो की दुश्मन हो जाती हूँ या फिर हिन्दू और हिंदुत्व का | लेकिन इनके अपने अपने टोलियो के ठेकेदार जो धंधा जमाये बैठे हैं धर्म का, उनसे इनको कोई शिकायत नहीं | क्यो...